अपना सुंदर घर और सुखद वाहन प्रत्येक व्यक्ति का सबसे बड़ा सपना होता है। वैदिक ज्योतिष में चतुर्थ भाव समस्त सुखों, भूमि, भवन और वाहनों का केन्द्र है। भूमि का कारक मंगल और वाहन का कारक शुक्र जब शुभ भावों में स्थित होते हैं, तो जातक को बिना किसी अड़चन के मनचाहा मकान और वाहन सुख प्राप्त होता है। सही समय और शुभ नक्षत्र में किए गए सौदे जीवनभर सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं।
चतुर्थेश व मंगल की स्थिति से अपने फ्लैट या मकान की प्राप्ति का समय।
शुक्र के प्रभाव से कार, बाइक या व्यावसायिक वाहन खरीदने के शुभ योग।
प्लॉट, फार्महाउस या जमीन के सौदे में कानूनी विवाद से रक्षा।
अपनी चंद्र राशि व इच्छित संपत्ति का चयन कर तात्कालिक ज्योतिषीय आकलन देखें।
मंगल जब दशम या चतुर्थ में स्वराशि के हों तो जातक कई मकानों व भूमियों का स्वामी बनता है।
चतुर्थ भाव में शुक्र व गुरु की शुभ दृष्टि जातक को जीवन में एक से अधिक लग्जरी वाहनों का स्वामी बनाती है।
मकान में रहने के बाद अकारण अशांति या बीमारी रहना; गृह शुद्धि व वास्तु पूजन से निवारण होता है।
नवमेश व चतुर्थेश की युति जातक को बिना विवाद के पूर्वजों की विशाल संपत्ति दिलाती है।
मकान की नींव हमेशा शुभ नक्षत्र व राहुकाल रहित मुहूर्त में चांदी के नाग-नागिन रखकर भरें।
वाहन के डैशबोर्ड पर सिद्ध मारुति यंत्र या हनुमान जी का सिंदूर का तिलक दुर्घटनाओं से रक्षा करता है।
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