देवी महालक्ष्मी केवल धन की ही नहीं, अपितु अष्ट ऐश्वर्य (आदि, धान्य, धैर्य, गज, संतान, विजय, विद्या व धन लक्ष्मी) की स्वामिनी हैं। जब कड़ी मेहनत और ईमानदारी के बावजूद धन हाथ में न रुके, निरंतर व्यापार में घाटा हो अथवा भारी कर्ज के बोझ से मानसिक तनाव बढ़ जाए, तब ऋग्वैदिक "श्री सूक्त" व आद्य शंकराचार्य विरचित "कनकधारा" महाअनुष्ठान द्वारा दरिद्रता का समूल नाश होकर घर में सुख, शांति व अखंड वैभव का आगमन होता है।
अनावश्यक खर्चों पर रोक, बचत में वृद्धि व धन के स्थाई वास का आशीर्वाद।
बैंक लोन, बाजार का कर्ज व पुरानी उधारी चुकाने के नए मार्ग प्रशस्त।
दुकान, फैक्ट्री, ऑनलाइन स्टार्टअप व व्यापार में ग्राहकों व सौदों की वर्षा।
यदि आप निम्न में से किसी भी संकट से जूझ रहे हैं, तो यह अनुष्ठान अत्यंत शुभ फल देता है:
कमलगट्टे की माला से प्रतिदिन पूर्व दिशा की ओर मुख कर 108 बार जप करें। अनुष्ठान में श्री सूक्त के 16 ऋचाओं के साथ हवन किया जाता है।
शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल व केसर भरकर श्री यंत्र पर अभिषेक करने से धन आकर्षित होता है।
घी में डूबे कमलगट्टे और मखाने की 108 आहुतियां देने से व्यापार में फंसा पैसा वापस आने लगता है।
सिद्ध 11 पीली कौड़ियों और 5 गोमती चक्र को लाल वस्त्र में बांधकर तिजोरी में रखने से धन की बरकत बनी रहती है।
वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा श्री सूक्त के 1,008 पाठ, कनकधारा जप एवं खीर-मधु से दशांश हवन संपन्न कराया जाता है।
अपने व्यापार स्थल या गृह शांति हेतु संकल्प कराएं। अभिमंत्रित कनकधारा ताबीज, श्रीयंत्र व प्रसाद घर भेजा जाएगा।
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