अर्थ (धन) जीवन के चार पुरुषार्थों में दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुण्डली का द्वितीय भाव धन संचय (Bank Balance), एकादश भाव नियमित आय (Cashflow), तथा नवम भाव भाग्य का प्रतिनिधित्व करता है। जब इन भावों के स्वामियों के मध्य युति, दृष्टि या राशि परिवर्तन होता है, तो महालक्ष्मी योग, कुबेर योग व वसुमती योग का निर्माण होता है। अपनी कुण्डली के धन योगों को जानकर आप सही वित्तीय निर्णय ले सकते हैं।
स्थाई संपत्ति, पैतृक धन व बैंक बैलेंस बढ़ाने के ग्रह योग।
आय के एक से अधिक साधन निर्मित करने वाले ज्योतिषीय योग।
ऋण से स्थायी मुक्ति व शेयर/जमीन में सुरक्षित निवेश की दिशा।
अपनी चंद्र राशि व वित्तीय प्राथमिकता चुनकर तात्कालिक ज्योतिषीय विश्लेषण देखें।
नवमेश का केंद्र में गुरु के साथ स्थित होना जातक को अपार ऐश्वर्य, मान-सम्मान व वैभव प्रदान करता है।
उपचय भावों (3, 6, 10, 11) में सभी शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध) हों तो जातक जीवनभर धनवान रहता है।
चंद्रमा के दोनों ओर कोई ग्रह न होने से धन संचय में भारी कठिनाई होती है; पूर्णिमा व्रत से शांति होती है।
द्वितीयेश व एकादशेश का परस्पर स्थान परिवर्तन जातक को धन का देवता "कुबेर" तुल्य समृद्ध बनाता है।
शुक्रवार को 5 गोमती चक्र व 5 कमलगट्टे लाल रेशमी कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखें।
घर के उत्तर (कुबेर) कोण को साफ रखें और पीतल या चांदी का कुबेर यंत्र स्थापित करें।
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