दीपावली प्रकाश का पर्व है, जो अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
यह प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी और समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ा है।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा के दिन व्रत रखा जाता है। अधिकांश भक्त पूरे दिन व्रत कर संध्या पूजा के बाद भोजन करते हैं। अनाज और दाल से बचें; फल और दूध ले सकते हैं। दीपावली के अन्य दिनों (धनतेरस, नरक चतुर्दशी, गोवर्धन पूजा, भाई दूज) में व्रत आवश्यक नहीं।
घर साफ करें और रंगोली से सजाएं। मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें। दीप और धूप जलाएं। मिठाई, फल और सिक्के चढ़ाएं। लक्ष्मी-गणेश पूजा करें: लक्ष्मी अष्टोत्तर और गणेश मंत्रों का जाप करें। घी के दीप से आरती करें। लक्ष्मी कथा पढ़ें। पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें और आतिशबाजी करें। पड़ोसियों से मिलकर मिठाई बांटें और शुभकामनाएं दें।
दीपावली की कथा भगवान राम की 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापसी से जुड़ी है। रावण को परास्त करने के बाद राम, सीता और लक्ष्मण अपनी नगरी लौटे। अयोध्यावासियों ने पूरे नगर में दीप जलाकर, सड़कों को सजाकर और आतिशबाजी करके उनका स्वागत किया। उस दिन से दीपावली रोशनी के पर्व के रूप में मनाई जाती है। एक अन्य कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान विष्णु को अपना पति चुना। यह दिन अनेक समुदायों के लिए नए वित्तीय वर्ष का आरंभ भी है।
Ph.D. in Vedic Studies from Banaras Hindu University with 15 years of experience in Hindu astrology and festival research.
Get festival reminders, panchang updates, and spiritual guidance
🟢 Online • निःशुल्क सहायक